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जय श्री राम - राम नवमी पर हिन्दी जुड़वाँ की कविताएं

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    जय श्री राम अद्भुत अखंड ईश्वर रघुराई   जिसकी कैसे करूं ब ड़ा ई जन्म भूमि जिनकी अयोध्या जिसके गुरु माता पिता आधार जो स्वयं हरि लीला के प्रमाण कण-कण बसते मेरे राम ।। 1                                                                       गुरुवर के परम आज्ञाकारी श्री हरि विष्णु के अवतारी जिन्होंने शिव धनुष को तोड़ा जिन्होंने वचन माना शासन छोड़ा कौन भला जग में उनसे अनजान कण-कण बसते मेरे राम ।। 2                                   दैत्यों को संहार , जन का भय मिटाया गिद्ध निषाद शबरी को गले लगाया सुग्रीव का संशय मिटाकर सम्मान दिया पास बिठाकर भावविभोर हो गले मिले हनुमान कण-कण बसते मेरे राम ।। 3   हेतर...