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जय श्री राम - राम नवमी पर हिन्दी जुड़वाँ की कविताएं

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    जय श्री राम अद्भुत अखंड ईश्वर रघुराई   जिसकी कैसे करूं ब ड़ा ई जन्म भूमि जिनकी अयोध्या जिसके गुरु माता पिता आधार जो स्वयं हरि लीला के प्रमाण कण-कण बसते मेरे राम ।। 1                                                                       गुरुवर के परम आज्ञाकारी श्री हरि विष्णु के अवतारी जिन्होंने शिव धनुष को तोड़ा जिन्होंने वचन माना शासन छोड़ा कौन भला जग में उनसे अनजान कण-कण बसते मेरे राम ।। 2                                   दैत्यों को संहार , जन का भय मिटाया गिद्ध निषाद शबरी को गले लगाया सुग्रीव का संशय मिटाकर सम्मान दिया पास बिठाकर भावविभोर हो गले मिले हनुमान कण-कण बसते मेरे राम ।। 3   हेतर...

त्याग

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त्याग   उससे कोई दो चार ही मुलाकातें हुई थी l पहली से आखिरी मुलाकात में भी वो अनमेरिड ही थी l मैंने उसे कई बार शादी के प्रस्ताव रखे कि अच्छा सा लड़का देख कर शादी कर लीजिए l क्योंकि एक बार किसी कॉन्फ्रेंस में गीता ने मुझे उस पर व्यंग्य करते हुए कहा था-वो अनमेरिड है ना l" शायद! मैंने जानबूझ कर यही कहा था l फिर एक बार गीता से फिर मुलाकात में वही प्रश्न - "अरे! तेरी मेम कैसी है हरि?" "एक दम मस्त" मेरा जवाब उसके चेहरे पर पानी फ़ेर देता वहीं मुझे भी कई-कई दिन परेशान भी करता l हर लड़की की अपनी मर्यादा होती है, अगर वो लड़का होती तो एक - एक लड़की को चार- चार बार देखकर रिजेक्ट करती फिर कोई कहीं फाइनल करके शादी करती, पर स्त्रीत्व का धन सदैव सीमित व इच्छाओं का दमन कर जीने वाला ही होता है l           गीता जब भी मुझसे मिलती न जाने क्यूँ उसी के बारे में यही एक ही सवाल पूछा करती थी l मैं बड़ा हैरान था, जिसे मैं ईश्वर के तुल्य समझा, उसके बारे में मेरे कानों ने कटुता भरे शब्द सुनने मिलते l ओर तो ओर दूसरे साथी भी उनके नाम की चुटकियां भरते,...

भारत माता

भारत माता वंदना वंदन वंदन है अभिनंदन युगे युगे महाभारती श्रद्धा स्नेह अति प्रेम वश समस्त जन करते आरती  रूप सुशोभित अद्वितीय अखंड वर्णित तेरी गाथा  यशस्वी अद्भुत महाकीर्ति हे भारतवर्ष भाग्य विधाता  शीश पर तेरे हिम का ताज है चरणों में रत्नाकर  नित करें देवगन वंदना तुम्हारी अमर महिमा गाकर  हिमालय के महा रूप में सर्वश्रेष्ठ सुशोभित नाम  अरावली विंध्य मल्य नील महेंद्र शक्तिमान  नदियों के पवित्र धारा वेग में बना धर्म का सूत्र गंगा यमुना कृष्णा कावेरी  गोदावरी ब्रह्मपुत्र  विपिन का विस्तृत आच्छादित सुगंध तृण फल फूल समीर  सदा सुदृढ़ अखंडित हिंदूकुश से हिंद सागर तक प्राचीर  जननी जन्मभूमि वीरों की मानवता कल्याणकारी  जन्में ययाति मनु भृगु रघु राम कृष्ण बुद्ध अवतारी  वेद उपनिषद ब्राह्मण ग्रंथों की सदा कलम सुशोभित  विश्व गुरु की महिमा थाती अंशु स्म वीर वसुंधरा विजित तेरे पावन चरणों में हम विनय दीप जलाते हैं  हे वसुधा भारती हम तेरी मधुर वंदना गातें हैं  हिंदी जुड़वाँ वचन हृदय से लहरे सदा विजय पताका  तेरे कमल चरणों मे...