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त्याग

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त्याग   उससे कोई दो चार ही मुलाकातें हुई थी l पहली से आखिरी मुलाकात में भी वो अनमेरिड ही थी l मैंने उसे कई बार शादी के प्रस्ताव रखे कि अच्छा सा लड़का देख कर शादी कर लीजिए l क्योंकि एक बार किसी कॉन्फ्रेंस में गीता ने मुझे उस पर व्यंग्य करते हुए कहा था-वो अनमेरिड है ना l" शायद! मैंने जानबूझ कर यही कहा था l फिर एक बार गीता से फिर मुलाकात में वही प्रश्न - "अरे! तेरी मेम कैसी है हरि?" "एक दम मस्त" मेरा जवाब उसके चेहरे पर पानी फ़ेर देता वहीं मुझे भी कई-कई दिन परेशान भी करता l हर लड़की की अपनी मर्यादा होती है, अगर वो लड़का होती तो एक - एक लड़की को चार- चार बार देखकर रिजेक्ट करती फिर कोई कहीं फाइनल करके शादी करती, पर स्त्रीत्व का धन सदैव सीमित व इच्छाओं का दमन कर जीने वाला ही होता है l           गीता जब भी मुझसे मिलती न जाने क्यूँ उसी के बारे में यही एक ही सवाल पूछा करती थी l मैं बड़ा हैरान था, जिसे मैं ईश्वर के तुल्य समझा, उसके बारे में मेरे कानों ने कटुता भरे शब्द सुनने मिलते l ओर तो ओर दूसरे साथी भी उनके नाम की चुटकियां भरते,...